बिहार के कोटा में पढ़ रहे छात्र हुए फेल! ‘नॉन-अटेंडिंग कल्चर’ ने छात्रों को कहीं का नहीं छोड़ा

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    कोटा में IIT-JEE और NEET की तैयारी कर रहे बिहार के कई छात्र 12वीं बोर्ड परीक्षा में असफल हो रहे हैं। CBSE Result 2026 ने बिहार में बढ़ते ‘नॉन-अटेंडिंग स्कूल कल्चर’, डमी एडमिशन और shortcut coaching model पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पढ़ें Psychographic Society की विशेष रिपोर्ट।

    देशभर में घोषित हुए CBSE Class XII Result 2026 ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। इस वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर पास प्रतिशत घटकर 85.20% रहा, जबकि बिहार के पटना ज़ोन का प्रदर्शन अपेक्षाकृत काफी कमजोर रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार बिहार में केवल 74.45% छात्र ही परीक्षा में सफल हो पाए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण तेजी से बढ़ता “नॉन-अटेंडिंग स्कूल कल्चर” है। बड़ी संख्या में छात्र 11वीं और 12वीं में किसी स्कूल में केवल नामांकन लेते हैं, जबकि उनकी वास्तविक तैयारी कोटा, दिल्ली, हैदराबाद या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए होती है। इससे छात्रों का स्कूल शिक्षा से जुड़ाव कमजोर हो रहा है।

    रिपोर्ट के मुख्य पॉइंट्स:

    • बिहार के कई स्कूलों में “dummy school” या कम attendance वाली पढ़ाई का ट्रेंड बढ़ा है, जहां छात्र सिर्फ coaching पर निर्भर रहते हैं।
    • CBSE Class 12 का national pass percentage 85.20% रहा, जबकि बिहार/Patna region का result लगभग 74.45% तक गिर गया।
    • Patna region देश के 22 CBSE regions में 21वें स्थान पर रहा।

    कुछ education experts का मानना है कि:

    • regular school attendance,
    • classroom interaction,
    • answer-writing practice,
    • और holistic learning की कमी
      भी कमजोर परिणाम का कारण बनी।

    CBSE ने बाद में 75% attendance rule को और सख्ती से लागू करने की दिशा में कदम भी उठाए।

    प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी का तरीका पूरी तरह अलग होता है। CBSE बोर्ड में step-wise marking, लिखने की शैली, presentation और conceptual explanation महत्वपूर्ण होते हैं, जबकि JEE/NEET objective pattern पर आधारित हैं। परिणामस्वरूप कई छात्र competitive preparation के बावजूद बोर्ड परीक्षा में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं।

    Psychographic Society का मानना है कि स्कूल केवल परीक्षा पास कराने का माध्यम नहीं, बल्कि छात्र के व्यक्तित्व निर्माण, अनुशासन, communication skill, emotional development और social learning का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। नियमित स्कूल attendance छात्रों में consistency और balanced preparation विकसित करती है।

    आज YouTube और सोशल मीडिया पर “4 दिन में बोर्ड तैयारी”, “100% guess paper”, “paper leak दावा” जैसे भ्रामक कंटेंट भी छात्रों को गुमराह कर रहे हैं। कई विद्यार्थी पूरे वर्ष की पढ़ाई छोड़कर shortcut strategy पर निर्भर हो जाते हैं, जिसका असर सीधे परिणामों में दिखाई देता है।

    CBSE द्वारा dummy admission और non-attending system पर सख्ती भी इसी समस्या की गंभीरता को दर्शाती है। बोर्ड ने पहले ही स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई की जाएगी।

    दिलचस्प बात यह है कि इस वर्ष केंद्रीय विद्यालय (KV), नवोदय विद्यालय (JNV) और नियमित academic environment वाले संस्थानों का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा। यह संकेत देता है कि disciplined schooling और नियमित अध्ययन अब भी सफलता की सबसे मजबूत नींव हैं।

    Psychographic Society की अपील

    • स्कूल शिक्षा को केवल formalities तक सीमित न करें
    • 75% attendance नियम को गंभीरता से लागू किया जाए
    • Competitive preparation और board studies में संतुलन बनाया जाए
    • Parents shortcut culture से बचें
    • Students conceptual learning और writing practice पर ध्यान दें

    भारत की शिक्षा व्यवस्था को केवल rank-oriented नहीं बल्कि balanced और holistic education system की ओर बढ़ना होगा। क्योंकि केवल entrance exam crack करना ही सफलता नहीं, बल्कि मजबूत academic foundation और व्यक्तित्व विकास भी उतना ही आवश्यक है।

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