डीएवी कपिलदेव के पूर्व प्राचार्य एमके सिन्हा को 3 साल की सजा, अदालत ने लगाया 10 हजार जुर्माना

रांची के चर्चित डीएवी कपिलदेव स्कूल मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व प्राचार्य मनोज कुमार सिन्हा (एमके सिन्हा) को दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें महिला कर्मचारी के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में 3 साल की सजा सुनाई है, साथ ही 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह मामला वर्ष 2022 में सामने आया था, जब स्कूल की एक महिला नर्स ने तत्कालीन प्राचार्य पर यौन उत्पीड़न और दबाव बनाने का आरोप लगाया था। शिकायत के बाद अरगोड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी और मामला तेजी से चर्चा में आया।
जांच के दौरान पुलिस ने कई साक्ष्य जुटाए थे। आरोप लगने के बाद एमके सिन्हा कुछ समय तक फरार भी रहे थे। बाद में पुलिस ने उन्हें जमशेदपुर से गिरफ्तार किया था। इस मामले में उन्होंने खुद को साजिश का शिकार बताया था, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर उन्हें दोषी माना।
मामले ने उस समय पूरे शिक्षा जगत में हलचल मचा दी थी, क्योंकि एमके सिन्हा लंबे समय तक रांची के प्रतिष्ठित स्कूल DAV Kapil Dev Public School से जुड़े रहे थे। वे राज्य के चर्चित शिक्षाविदों में गिने जाते थे।
इस फैसले को कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा और शिक्षा संस्थानों में जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना अब पहले से अधिक जरूरी हो गया है।
क्या था पूरा मामला?
- महिला नर्स ने प्राचार्य पर अशोभनीय व्यवहार और उत्पीड़न का आरोप लगाया था
- अरगोड़ा थाना में केस दर्ज हुआ
- पुलिस जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की गई
- आरोपी को बाद में गिरफ्तार किया गया
- हाईकोर्ट से उन्हें अंतरिम राहत मिली थी, लेकिन मामला जारी रहा
- सुनवाई के बाद अदालत ने दोषी मानते हुए सजा सुनाई
शिक्षा जगत में चर्चा तेज
इस फैसले के बाद रांची समेत झारखंड के शिक्षा जगत में महिला सुरक्षा, संस्थागत जवाबदेही और कार्यस्थल आचरण को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कई शिक्षाविदों का मानना है कि स्कूलों में Internal Complaints Committee (ICC) और महिला सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है।
