झारखंड कोचिंग एक्ट को मिली राज्यपाल की मंजूरी

झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने “झारखंड कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक, 2025” को मंजूरी दे दी है। इस नए कानून का उद्देश्य राज्य भर में कोचिंग संस्थानों पर नियंत्रण और पारदर्शिता स्थापित करना तथा छात्रों के हितों व सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।
पंजीकरण और निगरानी अनिवार्य
अब सभी कोचिंग सेंटरों को राज्य सरकार के पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
यदि किसी के पास एक से अधिक कोचिंग सेंटर हैं तो हर एक का अलग-अलग पंजीकरण कराना होगा।
कोचिंग संचालकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करना होगा, अन्यथा उन्हें दंड का सामना करना पड़ेगा।
पंजीकरण की वैधता पाँच वर्ष तक रहेगी।
पंजीकरण कराने वाले छात्रों को एक विशिष्ट पहचान संख्या (CED-ID) दी जाएगी।
प्रशासनिक ढांचा
जिला स्तर पर कोचिंग सेंटर विनियामक समिति की स्थापना होगी, जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त करेंगे।
राज्य स्तर पर एक विनियामक प्राधिकरण बनाया जाएगा, जिसका नेतृत्व सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी करेंगे।
यदि जिला समिति 90 दिनों के भीतर आवेदन पर निर्णय नहीं लेती है, तो राज्य प्राधिकरण में अपील का अधिकार मिलेगा।
छात्रों और अभिभावकों के प्रावधान
सभी कोचिंग सेंटरों को छात्रों के लिए मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध करानी होंगी, जैसे लैंगिक आधार पर सुविधाएँ।
कोचिंग का संचालन सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक ही किया जा सकेगा।
16 वर्ष से कम उम्र के छात्रों को माता-पिता की लिखित सहमति के बिना नामांकन नहीं दिया जाएगा।
फीस संरचना, निकासी और फीस वापसी नीति को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होगा।
कोचिंग संस्थान झूठे दावे, भ्रामक विज्ञापन और अत्यधिक मनोवैज्ञानिक दबाव नहीं दे सकेंगे।
जिन संस्थानों में 1000 से अधिक छात्र पढ़ते हैं, वहाँ कम से कम एक मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाता रखना अनिवार्य होगा।
बैंक गारंटी और दंड
बड़े कोचिंग केंद्रों को संचालन के लिए बैंक गारंटी जमा करनी होगी।
नियमों के उल्लंघन पर पहली बार 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
दूसरी बार उल्लंघन पर 10 लाख रुपये तक का दंड और पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।
पंजीकरण रद्द होने के बाद भी नियम तोड़ने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
